Business Wire India
| इनवॉयरमेंट इनà¥à¤µà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—ेशन à¤à¤œà¥‡à¤‚सी (ईआइà¤) की नई रिपोरà¥à¤Ÿ में खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ हà¥à¤† है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में कà¥à¤› बहà¥à¤°à¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ फासà¥à¤Ÿ फूड और बेवरेज कंपनियां कूलिंग के लिठà¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न कर 38 मिलियन मीटà¥à¤°à¤¿à¤• टन CO2 इकà¥à¤µà¤¿à¤µà¥ˆà¤²à¥‡à¤‚ट के उरà¥à¤¤à¥à¤¸à¤œà¤¨ से बच सकती हैं। यह à¤à¤• साल के लिठ8.5 मिलियन कारों को सड़कों से वापस लेने के बराबर है। हाइडà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤•ारà¥à¤¬à¤¨ (à¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€) पà¥à¤°à¤¬à¤² गà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¹à¤¾à¤‰à¤¸ गैसें है जिनका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• जलवायà¥-हितैषी रेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¤°à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ की उपलबà¥à¤§à¤¤à¤¾ के बावजूद रेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¤°à¥‡à¤¶à¤¨ और à¤à¤¯à¤° कंडिशनिंग में किया जाता है। पिछले साल, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में हर देश ने मॉनà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤² पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤•ॉल में किगाली संशोधन के तहत à¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€ को चरणबदà¥à¤§ तरीके से कम करने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ जताई थी। अविपà¥à¤¸à¤¾ महापातà¥à¤°à¤¾, ईआइठजलवायॠअà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– (कà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤Ÿ कैमà¥à¤ªà¥‡à¤¨ लीड) ने कहा, “किगाली संशोधन के तहत, à¤à¤¾à¤°à¤¤ इस सूची के अंतिम देशों में से à¤à¤• होगा जिसने à¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€ पर नियंतà¥à¤°à¤£ उपायों को शà¥à¤°à¥‚ किया है। इस तरह बहà¥à¤°à¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कंपनियों के लिठवैशà¥à¤µà¤¿à¤• बाजार के साथ कदमताल करना अतà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¶à¥à¤¯à¤• हो गया है।” “इस रिपोरà¥à¤Ÿ में बताया गया है कि ऊरà¥à¤œà¤¾ दकà¥à¤· à¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€-रहित विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ को अपनाने से 2030 तक 300 मिलियन डॉलर तक की बचत हो सकती है, लेकिन फिर à¤à¥€ बहà¥à¤°à¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कंपनियां लगातार पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ कूलिंग तकनीक का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर रही हैं जिससे à¤à¤¾à¤°à¤¤ में उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¨ का बोठबॠरहा है। कंपनियों के पास वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ जारी रखने के पीछे कोई बहाना नहीं है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह रà¥à¤– सिरà¥à¤« परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ रूप जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° à¤à¤µà¤‚ तकनीकी रूप से वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• ही नहीं है बलà¥à¤•ि आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से à¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¶à¥à¤¯à¤• है।” टà¥à¤°à¤¾à¤‚जिशनिंग à¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€à¤œ इन इंडिया में à¤à¤¾à¤°à¤¤ में कà¥à¤› तेजी से विकास कर रही बहà¥à¤°à¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ फासà¥à¤Ÿ फूड चेनà¥à¤¸ जैसे कि मैकडोनलà¥à¤¡à¥à¤¸, सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¤¬à¤•à¥à¤¸, सबवे और डोमिनोज का लगातार दूसरे वरà¥à¤· अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया गया। इसमें पता चला कि:
सेंटर फॉर साइंस à¤à¤‚ड à¤à¤¨à¤µà¥‰à¤¯à¤°à¤®à¥‡à¤‚ट, नई दिलà¥à¤²à¥€ के उप निदेशक शà¥à¤°à¥€à¤šà¤‚दà¥à¤° à¤à¥‚षण ने कहा, “किगाली संशोधन को अपनाने के बाद à¤à¥€, बहà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कंपनियां à¤à¤¾à¤°à¤¤ जैसे विकासशील देशों में लगातार दोहरे मानदंडों का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ कर रही हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी इचà¥à¤›à¤¾ से अपने मूल बाजार में हरित कूलिंग सिसà¥à¤Ÿà¤® का रà¥à¤– करने की उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ को अपनाया है लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ में वे à¤à¤¸à¤¾ करने से इनकार कर रही हैं। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिये और उन पर सखà¥à¤¤ मानदंड लागू करने चाहिये।” इस रिपोरà¥à¤Ÿ में बहà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ फासà¥à¤Ÿ फूड à¤à¤µà¤‚ बेवरेज शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खलाओं से à¤à¤šà¤à¤«à¤¸à¥€-रेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ जताने का आगà¥à¤°à¤¹ किया गया है। साथ ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार से मांग की गई है कि बहà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ कंपनियों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सिरà¥à¤« नà¥à¤¯à¥‚न गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² वारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग सामरà¥à¤¥à¥à¤¯ वाले रेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¤°à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना अनिवारà¥à¤¯ किया जाये। businesswire.com पर सोरà¥à¤¸ विवरण देखें: https://www.businesswire.com/news/home/20171029005081/en/ |
| संपरà¥à¤•: à¤à¤¨à¤µà¥‰à¤¯à¤°à¤®à¥‡à¤‚टल इनà¥à¤µà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—ेशन à¤à¤œà¥‡à¤‚सी अविपà¥à¤¸à¤¾ महापातà¥à¤°à¤¾, +1 347-931-0129 amahapatra@eia-global.org |